मरियानी में बांस की झाड़ियों में घुसा जंगली भालू, वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर काजीरंगा के जंगलों में छोड़ा :

मरियानी में बांस की झाड़ियों में घुसा जंगली भालू, वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर काजीरंगा के जंगलों में छोड़ा :
कैलाश पटवारी : बोकाखात :

Aiidesh News : 19 May - 2026 : 

कैलाश पटवारी : बोकाखात :

मरियानी के डोकलोंगिया डेका गांव में उस समय अफरातफरी मच गई, जब सुबह-सुबह सिंटेक्स फैक्ट्री के पास मुकुल सैकिया के घर के पीछे बांस की झाड़ियों में एक जंगली भालू देखा गया। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की मुस्तैदी से भालू को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है।त्वरित कार्रवाई और सफल रेस्क्यू भालू की खबर मिलते ही जोरहाट वन विभाग ने तुरंत बोकाखात स्थित वन्यजीव पुनर्वास और संरक्षण केंद्र (CWRC) को सूचित किया। CWRC की प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम पशु चिकित्सक डॉ. मेहदी हसन के नेतृत्व में तुरंत मौके पर पहुंची। स्थानीय वन कर्मियों के सहयोग से डॉ. हसन ने सूझबूझ दिखाते हुए भालू को ट्रैंक्विलाइजर (बेहोशी का इंजेक्शन) दिया। बेहोश होने के बाद उसे सुरक्षित पिंजरे में डालकर बोकाखात के बोरजुरी स्थित संरक्षण केंद्र ले जाया गया।प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य जांच यह भालू काफी बुजुर्ग था और बांस के एक बाड़े में फंसा हुआ था। संरक्षण केंद्र में डॉक्टरों की देखरेख में उसका प्राथमिक उपचार किया गया और उसे कुछ समय के लिए निगरानी में रखा गया। पूर्वी असम वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) अरुण विग्नेश ने बताया कि उम्र के कारण आई कमजोरी के अलावा भालू पूरी तरह स्वस्थ था। डॉ. मेहदी हसन ने भी पुष्टि की कि भालू के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं थे।प्राकृतिक आवास में सुरक्षित विदाई पूरी तरह स्वस्थ होने की पुष्टि के बाद, वन विभाग ने भालू को तुरंत आजाद करने का फैसला लिया। इसके बाद भालू को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के अगोरातोली वन क्षेत्र के तहत आने वाले 'कठोनी' के जंगलों में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया, जो भालुओं का प्राकृतिक निवास स्थान माना जाता है। वन विभाग और रेस्क्यू टीम की इस त्वरित और सुरक्षित कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने काफी सराहना की है।

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