असमिया सिनेमा की नायिका आईदैउ संदिकै को समर्पित गौरवमयी तोरण :
Aiidesh News : 22 May - 2026 :
कैलाश पटवारी, बोकाखात :
असम की सांस्कृतिक धरती पर आज इतिहास का एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। असमिया सिनेमा की पहली फिल्म ‘जयमती’ की नायिका आईदैउ संदिकै की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए, उनके नाम का भव्य तोरण पुनः स्थापित कर लोकार्पित किया गया। उरुली की मंगल ध्वनि, ढोल-नगाड़ों की गूंज और ज्योति संगीत की स्वर-लहरियों के बीच बोकाखात के विशिष्ट समाजसेवी महावीर प्रसाद अग्रवाला ने फीता काटकर तोरण का लोकार्पण किया। इससे पूर्व समाजसेवी-लेखक रामलाल मोर आईदैउ संदिकै की आदमकद प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया और दोनों विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। आईदैउ ने 1998 में अपनी तीन अंतिम इच्छाएं व्यक्त की थीं—गांव में पेयजल, विद्यालय का सरकारीकरण और नामघर पथ पर उनके नाम का तोरण। समाज से बहिष्कार झेलने के बावजूद ‘जयमती’ में अभिनय कर असमिया सिनेमा को जन्म देने वाली इस विभूति की तीसरी इच्छा को पूरा करने का संकल्प बोकाखात के अग्रवाला समाज ने लिया। 2001 में साहित्यकार चिदानंद सइकीया के कर-कमलों से तोरण का उद्घाटन हुआ था, जिसमें समाजसेवी रामअवतार जालान और पत्रकार महेश अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लेकिन विकास की रफ्तार में फोरलेन निर्माण के कारण यह तोरण हटाना पड़ा। वर्षों तक नामघर पथ सूना रहा, पर स्मृतियां जीवित रहीं। अंततः मुआवजे की राशि से गांववासियों ने नए स्थान पर तोरण का पुनर्निर्माण किया, जिसका आज गौरवमयी लोकार्पण हुआ। तोरण उन्मोचनी सभा में अग्रवाला समाज के रामलाल मोर, विनोद जालान, डॉ. बाबूलाल मोर, जीवन चौधरी, हेमंत चौधरी, सुरेश चौधरी, गोपाल पंसारी, प्रदीप अग्रवाला और महेश अग्रवाल को फुलाम गामोछा पहनाकर सम्मानित किया गया। साथ ही, तोरण निर्माण से जुड़े तिलेश्वर गोगोई, सुचित्र फुकन, प्रशांत बरबरुवा, मानस बरुवा, चंद्र फुकन, ललित फुकन, धर्मेश्वर गोगोई और मोहेन चंद्र बरुवा को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया। सभा में दो महत्वपूर्ण मांगें गूंजीं आईदैउ का इतिहास पाठ्यक्रम में शामिल हो और असम के सिनेमाघर उनके नाम पर हों विशिष्ट अतिथि जितु शर्मा राजखोवा (असम राज्यिक पत्रकार संस्था अध्यक्ष) और बुबुल दत्त (बोकाखात महकमा पत्रकार संस्था अध्यक्ष) ने इन मांगों को स्वर दिया। यह तोरण केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि सृजन, समर्पण और सेवा की त्रिवेणी है। आज का दिन बोकाखात के अग्रवाला समाज के लिए गर्व करने और समाजहित में और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेने का रहा।
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